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प्राथमिक और द्वितीयक कष्टार्तव के कारण और उपचार

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डिसमेनोरिया या कष्टार्तव महिलाओं में होने वाली सबसे आम समस्याओं में से एक है, यह पीरियड्स के दौरान होने वाले गर्भाशय के संकुचन के कारण होता है। प्रत्येक महिला में दर्द का स्तर भिन्न-भिन्न होता है। यह इतनी तेज़ होता है कि दैनिक गतिविधियो में भी परेशानी होती है, स्कूल या काम पर जाने में परेशानी होती है और यह जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है।

पैथोफिज़ियोलॉजी या निदान के आधार पर, डिसमेनोरिया 2 प्रकार का होता है:

  • प्राइमरी डिसमेनोरिया या प्राथमिक कष्टार्तव
  • सेकंडरी डिसमेनोरिया या द्वितीयक कष्टार्तव

प्राथमिक कष्टार्तव हर महीने होने वाला पीरियड्स का दर्द है, यह बिना किसी बीमारी के होता है, जबकि द्वितीयक कष्टार्तव प्रजनन प्रणाली के विकारों के परिणामस्वरूप होने वाला दर्द है।

प्राथमिक और द्वितीयक कष्टार्तव का कारण क्या है?

प्राथमिक कष्टार्तव पीरियड्स में रक्तस्राव के दौरान होता है और प्रोस्टाग्लैंडिंस (लिपिड्स का एक समूह) या वैसोप्रेसिन (एक प्रकार का हार्मोन) के अधिक बनने के कारण होता है। जब पीरियड्स शुरू होते हैं तो एंडोमेट्रियल कोशिकाओँ से प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्राव होता है जो मांसपेशियों को संकुचित कर रक्त प्रवाह को रोक देता है। प्रत्येक महिला में प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्राव भिन्न होता है; जितना अधिक प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्राव होता है, उतना ही अधिक गंभीर डिसमेनोरिया हो जाता है। यही कारण है कि हर महिला एक जैसा दर्द महसूस नहीं करती।

दूसरी ओर, द्वितीयक कष्टार्तव प्रजनन अंगो के विकार या संक्रमण के कारण होता है जैसे फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस, एंडोमेट्रियल पॉलीप्स, ओवेरियन सिस्ट, पैल्विक इन्फ्लेमेटरी डिसीज़, एडेनोमायोसिस आदि।

प्राइमरी और सेकंडरी डिसमेनोरिया के लक्षण

प्राथमिक कष्टार्तवद्वितीयक कष्टार्तव
रजोदर्शन या उसके 6-12 माह के अंदर ही शुरु हो जाता है तथा पीरियड्स के साथ ही होने लगता है।किसी भी उम्र में हो सकता है, महिला के 30-40 साल की उम्र में नये लक्षण के तौर पर उभर सकता है।
बार-बार तथा हर चक्र के साथ होता है।हर चक्र में होना आवश्यक नही।
उदर के निचले हिस्से या श्रोणी में दर्द होता है।उदर में कही भी दर्द हो सकता है।
पीरियड्स के शुरु होते ही दर्द होता है, 1-2 दिन पहले भी शुरु हो सकता है और 8-72 घंटे तक रहता है।कभी भी दर्द हो सकता है, अकसर इसकी अवधि तथा गम्भीरता में बदलाव आता है।
इसमे दूसरे लक्षण जैसे कमर और जांघो में दर्द, मतली तथा उल्टी, दस्त और सिर दर्द आदि मिल सकते हैं।निदान के आधार पर दूसरे लक्षण जैसे संभोग के दौरान दर्द, भारी रक्तस्राव आदि मिल सकते हैं।
लैब टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और अन्य परीक्षाएँ सामान्य होती हैं।शारीरिक जाँच में प्रजनन तंत्र में असामान्यता मिलती है और अल्ट्रासाउंड द्वारा रोग का पता लगाया जाता है।

प्राथमिक और द्वितीयक कष्टार्तव का इलाज

यद्यपि अधिकांश महिलाओं को मासिक धर्म के रक्तस्राव के दौरान असुविधा होती है, फिर भी प्रभावी इलाज के लिए असामान्य लक्षणो को देखना आवश्यक है।

प्राथमिक और द्वितीयक कष्टार्तव दोनों के निदान के लिए शारीरिक परीक्षण और रोगी के अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है। ये आमतौर पर प्राथमिक कष्टार्तव के निदान के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन द्वितीयक कष्टार्तव के कारण को जानने के लिये अन्य परीक्षण भी आवश्यक है।

उपचार का मुख्य उद्देश्य रोगी के दर्द को दूर करना और पेरासिटामोल, एस्पिरिन, एनएसआईडी, और गर्भ निरोधक गोलियो से दर्द (यानी, प्रोस्टाग्लैंडीन उत्पादन) के कारण का इलाज करना है। हालांकि रोगी के लक्षणों का प्रभावी इलाज करने वाली ये दवाएं इसके कारण का इलाज नहीं करती और एसिड रिफ्लक्स, पेट की सूजन, और दिल के दौरे जैसे दुष्प्रभाव भी होते हैं।

एक वैकल्पिक दृष्टिकोण

ऐसी स्थितियों में, कष्टार्तव को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए आयुर्वेद एक प्राकृतिक और दीर्घकालिक विकल्प है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डिसमेनोरिया के अंतर्निहित कारणों को जान कर शरीर की सामान्य क्रियाओ में बदलाव किए बिना इसका इलाज कर सकता है। यदि आप अपने दर्द को सही तरीके से और बिना साइड इफेक्ट ठीक करना चाहते हैं, तो अधिक जानने के लिए हेम्पस्ट्रीट पर जाएं। यहां आप विशेषज्ञ से बात कर सकते हैं जो आपको दर्दनाक पीरियड्स से छुटकारा दिला सकते हैं और उपचार के साथ-साथ मार्गदर्शन भी कर सकते हैं।

संदर्भ

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1459624/

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/2178834/

https://www.thesun.co.uk/fabulous/6006411/period-pain-painkillers-bad-idea-ease-cramps/

https://blog.hempstreet.in/identifying-the-causes-and-treatment-of-primary-and-secondary-dysmenorrhea/

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