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क्या आप जानते हैं कि आपके पीरियड्स के पीछे कौन सा दोष है?

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आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार, दुनिया पांच तत्वों से मिलकर बनी है – आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी। इन तत्वों के संयोजन से तीन बल या दोष बनते हैं, जिन्हें वात, पित्त और कफ के रूप में जाना जाता है, साथ में ये एक व्यक्ति के मानसिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को निर्धारित करते हैं।

मासिक धर्म / पीरियड्स एक महिला के शरीर में होने वाले गर्भधारण के लिये होने वाले परिवर्तनों की एक श्रृंखला है। यह उसके संपूर्ण प्रजनन स्वास्थ्य का एक संकेतक है, एक नियमित चक्र 28 दिनों तक रहता है लेकिन हमारे शरीर हमेशा ठीक तरह काम नहीं करते। प्रत्येक व्यक्ति में इन दोषों का अलग अनुपात होता है, और अलग-अलग दोषों का मासिक धर्म के विशिष्ट भागों में एक अलग प्रभाव पड़ता है।

  • चक्र के पहले आधे हिस्से जो मासिक धर्म के ठीक बाद में होता है, उसमे कफ की प्रधानता होती है।
  • ओव्यूलेशन अगले चरण की शुरुआत को चिह्नित करता है, जो पित्त से प्रभावित होता है। इस दौरान एस्ट्रोजन में गिरावट पीएमएस के लक्षणों की ओर ले जाती है।
  • यदि अंडा निषेचित नहीं हुआ, तो अंतिम चरण आता है और वात में अचानक वृद्धि हो कर यह मासिक धर्म को प्रारम्भ करता है।

आपके शरीर में दोषों के संतुलन (या असंतुलन) से मासिक धर्म तथा उसके पहले और बाद के लक्षणो का सीधा संबंध हैं।

वात प्रभावित रक्त प्रवाह के लक्षण

महिला प्रजनन तंत्र में, वात रक्त वाहिकाओं के माध्यम से काम करता है, जिससे प्रवाह को कम करने में मदद मिलती है। वात के प्रभाव के बिना, श्रोणि में असंतुलन की संभावना होती है, जिससे विभिन्न विकार होते हैं। वात रक्त वाहिकाओं के माध्यम से गर्भाशय में जाता है और इसके शीत और रुक्ष गुण कठिनता प्रदान करते हैं। यह रुक्षता शारीरिक ऊतकों को नश्ट कर रक्त के प्रवाह को रोक देती है। अधिकांश वात से प्रभावित आर्तव चक्र तीव्र बेचैनी के साथ होते हैं, इसमे अक्सर पीठ या निचले पेट में दर्द और चिंता और घबराहट होती हैं।

वातज प्रवाह को संतुलित करना

आयुर्वेद में कहा गया है कि मासिक धर्म में रक्त या आर्तव लसीका या रस धातू की उपधातू है तथा हम जो भी खाते हैं उसका हमारे रस पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

वातज मासिक धर्म के दौरान गर्मी, भारीपन और स्थिरता जैसे गुण शरीर के लिये फायदेमंद होते हैं। बहुत सारे घी में तैयार गर्म और गरिष्ठ भोजन तथा वात को कम करने वाला आहार लें। मासिक धर्म शुरू होने से पहले, कैस्टर ऑयल लगाने से शरीर को आंतरिक रूप से गर्मी तथा पोषण मिलता है और वात के रुक्ष गुण के कारण होने वाली रुकावट को रोक सकते हैं। पानी और अन्य तरल पदार्थों जैसे कि अलसी के तेल से शरीर को हाइड्रेट करना भी समान रूप से आवश्यक है। मासिक धर्म से पहले प्राणायाम का अभ्यास करना भी वात को शांत करता है।

पित्त प्रभावित रक्त प्रवाह के लक्षण

पित्त गर्मी और तरलता लाता है और रक्त को आसानी से बहने देता है। पित्तज मासिक धर्म चक्र अक्सर भारी होते हैं जिसकी शुरुआत में स्थिर प्रवाह होता है परंतु चक्र के अंत में यह प्रवाह बढ़ जाता है। क्रोध और चिड़चिडेपन के अलावा यह स्तनों में सूजन और छूने पर दर्द भी पैदा करता है।

पित्तज प्रवाह को संतुलित करना

पित्त के तीक्ष्ण और ऊश्ण गुण को शीतलता और मृदुता से संतुलित करेँ। मसालेदार और तैलीय भोजन से बचें और काम से संबंधित तनाव और प्रतिस्पर्धा पर लगाम लगा कर पित्त को संतुलित करने वाली जीवन शैली को अपनाएं। मासिक धर्म से पहले नारियल का तेल लगाने से सिरदर्द, मतली और दस्त जैसे संभावित लक्षणो से राहत मिलती है। शीतली और शीतकारी प्राणायाम पित्तज प्रकृति के व्यक्ति के लक्षणों को कम करने के लिए आदर्श हैं।

कफ प्रभावित रक्त प्रवाह के लक्षण

ऐसे व्यक्ति जिनमे कफ का असंतुलन होता है, उन लोगों को रक्त प्रवाह में ठहराव और रुकावट जैसी मुश्किलो का सामना करना पड़ सकता है जो मासिक धर्म से पहले और मासिक धर्म के दौरान सूजन जैसे लक्षणो को जन्म देते हैं। अधिक रुकावट के परिणामस्वरूप ऊतको का विकास ज़्यादा होता है, जिससे वातज चक्र की तुलना में भारी प्रवाह होता है। इसके कारण बेचैनी, अवसाद, असंतुलित भोजन सेवन, सूजन, और फंगल संक्रमण हो सकता है।

कफज प्रवाह को संतुलित करना

कफ के द्रव और गुरु गुण के कारण होने वाले भारीपन और स्थूलता को कम करेँ। अदरक, दालचीनी, इलायची जैसे गर्म मसालों का उपयोग बढ़ाएं और पूरे दिन गर्म और रुक्षता पैदा करने वाली दिनचर्या रखें। सक्रिय रहने से शरीर में लिम्फ और रक्त के परिसंचरण को उत्तेजित करने में मदद मिलती है।

मासिक धर्म से पहले कैस्टर ऑयल का उपयोग करने से श्रोणि की स्थिरता कम करने में मदद मिलती है। हालाँकि, यदि आपका प्रवाह सामान्य से अधिक भारी है, तो चौंकिये नहीं क्योंकि यह रुकावट के बह जाने का संकेत है। त्वचा को गर्म रखने और लसीका को गति देने के लिए नमक के स्क्रब से मालिश कर सकते हैं। भस्त्रिक और कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करने से मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद मिलती है जिससे श्रोणि और निचले पेट की मालिश होती हैं।

निष्कर्षयदि आप एक स्वस्थ मासिक धर्म चाहते हैं, तो आयुर्वेद को अपनाना सर्वोत्तम है। आयुर्वेद साइड-इफेक्ट्स के बोझ के बिना दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है और पीरियड्स के दौरान होने वाले असहनीय दर्द को कम या समाप्त भी कर सकता है। आप हेम्पस्ट्रीट पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण अपनाने से होने वाले लाभों के बारे में अधिक जान सकते हैं। आप अपने मासिक धर्म चक्र को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए इसके विशेषज्ञ से विशेष मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकते हैं।

पित्त प्रभावित रक्त प्रवाह के लक्षण

पित्त गर्मी और तरलता लाता है और रक्त को आसानी से बहने देता है। पित्तज मासिक धर्म चक्र अक्सर भारी होते हैं जिसकी शुरुआत में स्थिर प्रवाह होता है परंतु चक्र के अंत में यह प्रवाह बढ़ जाता है। क्रोध और चिड़चिडेपन के अलावा यह स्तनों में सूजन और छूने पर दर्द भी पैदा करता है।

मासिक धर्म के स्वास्थ्य के लिए आज ही डॉक्टर से सलाह लें

पित्तज प्रवाह को संतुलित करना

पित्त के तीक्ष्ण और ऊश्ण गुण को शीतलता और मृदुता से संतुलित करेँ। मसालेदार और तैलीय भोजन से बचें और काम से संबंधित तनाव और प्रतिस्पर्धा पर लगाम लगा कर पित्त को संतुलित करने वाली जीवन शैली को अपनाएं। मासिक धर्म से पहले नारियल का तेल लगाने से सिरदर्द, मतली और दस्त जैसे संभावित लक्षणो से राहत मिलती है। शीतली और शीतकारी प्राणायाम पित्तज प्रकृति के व्यक्ति के लक्षणों को कम करने के लिए आदर्श हैं।

कफ प्रभावित रक्त प्रवाह के लक्षण

ऐसे व्यक्ति जिनमे कफ का असंतुलन होता है, उन लोगों को रक्त प्रवाह में ठहराव और रुकावट जैसी मुश्किलो का सामना करना पड़ सकता है जो मासिक धर्म से पहले और मासिक धर्म के दौरान सूजन जैसे लक्षणो को जन्म देते हैं। अधिक रुकावट के परिणामस्वरूप ऊतको का विकास ज़्यादा होता है, जिससे वातज चक्र की तुलना में भारी प्रवाह होता है। इसके कारण बेचैनी, अवसाद, असंतुलित भोजन सेवन, सूजन, और फंगल संक्रमण हो सकता है।

कफज प्रवाह को संतुलित करना

कफ के द्रव और गुरु गुण के कारण होने वाले भारीपन और स्थूलता को कम करेँ। अदरक, दालचीनी, इलायची जैसे गर्म मसालों का उपयोग बढ़ाएं और पूरे दिन गर्म और रुक्षता पैदा करने वाली दिनचर्या रखें। सक्रिय रहने से शरीर में लिम्फ और रक्त के परिसंचरण को उत्तेजित करने में मदद मिलती है।

मासिक धर्म से पहले कैस्टर ऑयल का उपयोग करने से श्रोणि की स्थिरता कम करने में मदद मिलती है। हालाँकि, यदि आपका प्रवाह सामान्य से अधिक भारी है, तो चौंकिये नहीं क्योंकि यह रुकावट के बह जाने का संकेत है। त्वचा को गर्म रखने और लसीका को गति देने के लिए नमक के स्क्रब से मालिश कर सकते हैं। भस्त्रिक और कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करने से मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद मिलती है जिससे श्रोणि और निचले पेट की मालिश होती हैं।

निष्कर्ष

यदि आप एक स्वस्थ मासिक धर्म चाहते हैं, तो आयुर्वेद को अपनाना सर्वोत्तम है। आयुर्वेद साइड-इफेक्ट्स के बोझ के बिना दीर्घकालिक समाधान प्रदान करता है और पीरियड्स के दौरान होने वाले असहनीय दर्द को कम या समाप्त भी कर सकता है। आप हेम्पस्ट्रीट पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण अपनाने से होने वाले लाभों के बारे में अधिक जान सकते हैं। आप अपने मासिक धर्म चक्र को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए इसके विशेषज्ञ से विशेष मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकते हैं।

https://blog.hempstreet.in/do-you-know-your-periods-dosha/

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