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त्रैलोक्य विजया वटी: डिस्मेनोरिया पर आयुर्वेद का सकारात्मक प्रभाव

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सार: किशोर लड़कियों की स्कूलों से अनुपस्थिति के प्रमुख कारणों में एक डिस्मेनोरिया भी है। प्रोस्टाग्लैंडिंस के उत्पादन के कारण गर्भाशय में बढ़े हुए संकुचन और रक्त की कमी से असहनीय दर्द का अनुभव होता है। डिसमेनोरिया में अक्सर मतली और उल्टी जैसे गैस्ट्रिक लक्षण भी आते हैं जिनसे व्यक्ति का स्वास्थ्य और खराब होता है।

पारंपरिक चिकित्सा उपचार पीरियड्स के दर्द को प्रबंधित करने में असमर्थ हैं। दर्द को कम करने में सक्षम दवाओ के साइड इफेक्ट भी आते हैं। जहाँ एक तरफ पारंपरिक उपचार ज़्यादा लाभकारी नहीं है, वही त्रैलोक्य विजया वटी एक शक्तिशाली शास्त्रीय आयुर्वेदिक योग है जो कष्टार्तव के प्रबंधन में आशा की एक नई किरण देता है।

यह केस रिपोर्ट 16 साल की लड़की की है जो कष्टार्तव से पीड़ित थी, यहाँ तक कि इसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती भी कराना पडता था।

परिचय

डिसमेनोरिया या प्राथमिक डिसमेनोरिया में पीरियड्स के दौरान बिना किसी पैल्विक पैथोलॉजी के पेट में ऐंठन और दर्द होता है। कष्टार्तव का कारण बढ़े हुए प्रोस्टाग्लैंडिंस और ल्यूकोट्रिएनेस उत्पादन को माना जा सकता है जो गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन को तेज करते हैं जिससे गर्भाशय में रक्त आपूर्ति कम हो जाती है। किशोर लडकियो में डिसमेनोरिया के साथ-साथ गैस्ट्रिक लक्षण भी आते हैं जैसे सूजन, मतली, उल्टी, दस्त और सिरदर्द इत्यादि।

आयुर्वेद में कष्टार्तव नामक रोग में दर्दनाक पीरियड्स का वर्णन किया गया है। शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथो में कष्टार्तव को रोग के बजाय स्त्री संबंधी विकारों के लक्षण के रूप में बताया गया है। वात दोष का एक प्रकार, अपान वात जब दूशित हो जाती है तो यह पीरियड्स को बाधित करने के साथ गंभीर ऐंठन और दर्द भी उत्पन्न करती है।

शरीर के एंडोकैनाबिनोइड सिस्टम का चयापचय तीन कारकों एंडोकैनाबिनोइड्स, रिसेप्टर्स और एंजाइमों पर निर्भर करता है। ये तीनों मिलकर शरीर में किसी भी प्रकार के दर्द और विनियामक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। गर्भाशय की परत में भी एंडोकेनाबिनोइड रिसेप्टर्स उपस्थित होते हैं। प्राकृतिक कैनाबिनोइड इन रिसेप्टर्स के साथ बंध जाते हैं जिससे दर्द तुरंत ही ठीक हो जाता है।   

केस रिपोर्ट 

रोगी का विवरण

यह केस रिपोर्ट 16 साल की लड़की की है जो गंभीर लक्षण वाले कष्टार्तव से पीड़ित थी। पीरियड्स के दौरान लगातार उल्टी और तेज़ पेट दर्द की वजह से रोगी को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था।

इतिहास इतिवृत्त

रोगी एक युवा लड़की थी जिसे पीरियड्स के दौरान मतली, उल्टी और पेट में ऐंठन की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका अल्ट्रासाउंड सामान्य था और उपचार के बावजूद उसे किसी भी लक्षण में कोई राहत नहीं मिली। अंतिम उपाय के रूप में, रोगी को त्रैलोक्य विजया वटी दी गई। दूसरी खुराक के साथ ही दर्द और अन्य गैस्ट्रिक लक्षण एवम् भूख में सुधार हुआ।

उपचार योजना

रोगी को शुरू में अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसे गैर-ओपिओइड और ओपिओइड-एनाल्जेसिक दी गई लेकिन उसे कोई खास राहत नहीं मिली। बल्कि इससे मतली, उल्टी और एनोरेक्सिया जैसे लक्षण बढ़ गए। दर्द के लिए विभिन्न पारंपरिक उपाय करने पर भी लक्षणों में कोई कमी नहीं आई।

अंत में, पीरियड के तीसरे दिन, सुबह-शाम उसे त्रैलोक्य विजया वटी दी गई। पहली खुराक के साथ ही रोगी में सुधार हुआ और लक्षणों विशेषकर दर्द में 50% तक राहत मिली। दूसरी खुराक से दर्द पूरी तरह से खत्म हो गया। इसके अलावा, गैस्ट्रिक लक्षणों में आराम आया, विशेष रूप से भूख में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

परिणाम

विभिन्न माध्यमो से कष्टार्तव के इलाज के बाद भी राहत न मिलने पर, किसी अन्य दवा या उपचार से ज़्यादा आशा नहीं थी। दर्द के इलाज के लिये अंतिम उपाय के रूप में त्रैलोक्य विजया वटी दी गई और इससे वास्तव में जबरदस्त परिणाम मिले।

दूसरी खुराक से दर्द पूरी तरह से खत्म हो गया और रोगी को शांति मिली। वह इलाज से काफी संतुष्ट और निश्चिंत थी। त्रैलोक्य विजया वटी के किशोरावस्था के कष्टार्तव में अद्भुत परिणाम मिले। सुबह की पहली खुराक से उसे 50% तक दर्द से राहत मिली। दो-दिन की पीडा के बाद वह शांति से सोई। दूसरी खुराक के बाद गैस्ट्रिक लक्षणों के सुधार के साथ उसकी भूख में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

विचार-विमर्श

रोगी में वात और कफ दोश के कारण ऐसे लक्षण आ रहे थे। त्रैलोक्य विजया वटी के वातघ्न गुण और उदर रोगो में इसके फायदो के कारण इसे रोगी को दिया गया। इसने वास्तव में चमत्कारी परिणाम दिए।

निष्कर्ष

यह केस रिपोर्ट इस बात का सुबूत है कि त्रैलोक्य विजया वटी से इस रोग को प्रभावी रूप से प्रबंधित किया जा सकता है। हालांकि अभी भी किशोरों और युवा वयस्कों में भांग और इसके योगो के विवेकपूर्ण उपयोग के संदर्भ में कुछ शोध की आवश्यकता है।

अध्ययन: डॉ. पी. जे. अजीब

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