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ऑस्टियोआर्थराइटिस में लंबे समय तक दर्द का प्रबंधन करने में आयुर्वेद की भूमिका

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ओस्टियोआर्थराइटिस जिसे आमतौर पर ओ.ए. के रूप में जाना जाता है, बहुत ही आम संधि रोग है और सामान्य चिकित्सा अभ्यास में प्रबंधित पुरानी बीमारियो में से एक है। इसकी व्यापकता उम्र के साथ बढ़ती है, फिर भी वयस्कों की एक बडी संख्या जीवनकाल की शुरुआत में ही ओए के लक्षणों का अनुभव कर लेती है। ओए के अधिकांश मामले असाधारण नहीं हैं, फिर भी प्रभावितों के व्यक्तिगत अनुभव चिकित्सक को इस बीमारी के प्रभाव को समझने में मदद कर सकते हैं।

यह केस रिपोर्ट ऐसे मरीज की है, जो अपनी कहानी बताने के लिए उत्सुक थी और ओए से पीड़ित अन्य लोगों तक भी पहुंचाना चाहती थी- कि कैसे एक साधारण आयुर्वेद दवा ने उसे लंबे समय तक दर्द को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में मदद की। इससे रोगियों पर सकारात्मक प्रभाव पडता है और चिकित्सकों को चिकित्सा ठीक से करने में मदद मिलती है, इस मामले के सारांश में त्रैलोक्य विजया वटी के उपयोग पर प्रकाश डाला गया है।

परिचय

ऑस्टियोआर्थराइटिस तब होता है जब हमारे जोड़ों में हमारी हड्डियों के छोरों को बचाने वाली उपास्थि धीरे-धीरे खराब हो जाती है।

ओए को अक्सर “वियर एंड टियर” बीमारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन उपास्थि के टूटने के अलावा, ओए पूरी संधि को प्रभावित करता है। यह हड्डी में परिवर्तन और संयोजी ऊतकों के खराब होने का कारण बनता है जो जोडो को एक साथ रखते हैं और मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ते हैं। यह जोड़ों की सूजन का भी कारण बनता है।

ओए में दर्द और सीमित गतिशीलता कार्टिलेज के नष्ट होने के परिणामस्वरूप होती है। इस वजह से हड्डियां एक-दूसरे के साथ रगड़ती हैं और इससे दर्द होता है – विशेष रूप से हाथ, रीढ़, घुटने और कूल्हे में।

वर्षों से, ओए के लिए बहुत सीमित उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। उपचार में अंतिम उपाय के रूप में दर्द प्रबंधन, स्टेरायडल इंजेक्शन, फिजियोथेरेपी और सर्जरी शामिल हैं। इनमें से दर्द प्रबंधन सबसे अच्छा इलाज है क्योंकि दर्द या वेदना इस स्थिति का एक प्रमुख लक्षण है।

केस रिपोर्ट

रोगी का वर्णन

एक 48 साल की महिला को 8 साल से दोनों घुटनों में दर्द की शिकायत थी, पिछले 3 महीनों से दर्द मध्यम से गंभीर और बाद मे असहनीय हो गया था जो बढ़ती चिंता और नींद न आने का कारण बन रहा था। दर्द चलने या सीढ़ियों पर चढ़ने जैसी गतिविधियो से बढ जाता था और आराम करने से राहत मिलती थी।

इतिहास इतिवृत्त

रोगी के गिरने या आघात का कोई इतिहास नहीं था। वह बिना सहायता के चल सकती थी, लेकिन जब दर्द बहुत बढ जाता था तो मदद की आवश्यकता होती थी।

रोगी को याद नहीं था कि वह कब से एनाल्जेसिक या दर्द निवारक दवाओ पर थी, डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर फिजियोथेरेपी सत्र भी लेती थी। उसने एक-दो बार इंट्रा-आर्टिकुलर इंजेक्शन लिया लेकिन राहत अस्थायी(6-8 महीने) रूप से मिली। उसे हाल ही में उसके डॉक्टर द्वारा दोनो घुटनो के प्रतिस्थापन की सलाह दी गई थी और उसने इसे अंतिम विकल्प के रूप में रखा था! उसकी मुख्य चिंता दर्द ही थी।

हाल ही में दर्द की गंभीरता इतनी तीव्र थी कि उसके लिए सीढ़ियों का उपयोग करना असंभव था और वह ज्यादा समय बैठी रहती थी।

शारीरिक जाँच

बीएमआई – 30 (मोटापे से ग्रस्त)

चाल – विकृत

स्पर्श परीक्षा – दोनों घुटनों के जोड़ों को हिलाने पर हल्का क्रेपिटस महसूस हुआ

गति – प्रतिबंधित और दर्दनाक

रक्त परिणाम – ईएसआर और सीआरपी बढा हुआ

उपचार योजना

उपयोग की जाने वाली दवाएं – त्रैलोक्य विजया वटी। पूरी तरह से नैदानिक ​​परीक्षा के बाद, उसे शुरू में सात दिनों की अवधि के लिए दिन में दो बार एक टैबलेट त्रैलोक्य विजया वटी दी गयी।

उपचार योजना के अपेक्षित परिणाम

यह अपेक्षित था कि उसे दर्द से राहत मिलेगी और रोगी को अच्छी नींद आयेगी।

वास्तविक परिणाम

एक सप्ताह के भीतर, उसे अपने दर्द में अंतर दिखाई देने लगा।

विचार-विमर्श

उपचार प्रभावी दर्द प्रबंधन पर केंद्रित था क्योंकि यह रोगी को बहुत परेशान कर रहा था। रोगी सर्जरी के लिए तैयार नहीं थी हालाकि उसे 5 साल या उससे अधिक की अवधि में ऑपरेशन की सलाह दी गई थी।

उसे ओए के लिये प्रभावी अन्य दवाओं और हल्के व्यायाम का सेवन भी कराया गया। त्रैलोक्य विजया वटी से न केवल दर्द कम हुआ, बल्कि उसे रात में नींद भी सही आयी। रोगी ने पूरे दिन चिडचिडापन कम होने की भी बात कही।

निष्कर्ष

सालों से, ओए के उपचार में प्रमुख रूप से फिजियोथेरेपी, स्टेरॉइडल इंजेक्शन और संधि प्रतिस्थापन सर्जरी बतायी जा रही है। लेकिन जैसा कि दर्द प्रबंधन अब एक अलग शाखा के रूप में उभर रहा है, ओए के उपचार में दर्द प्रबंधन पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है।

रुमेटॉयड आर्थराइटिस के विपरीत, ओ.ए. के चिकित्सा उपचार में नाटकीय रूप से सुधार नहीं देखा गया है। ओ.ए. के लिए दवा का विकास धीमा रहा है क्योंकि रोग स्वयं भी धीरे-धीरे ही बढता है।

अध्ययन – डॉ अनिरुद्ध मोहिते

हेम्पस्ट्रीट द्वारा प्रकाशित

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